file 2026 01 10T16 35 00 बौंसी में कड़ाके की ठंड के बीच आस्था का अद्भुत दृश्य, पापहारिणी सरोवर में सफा संप्रदाय के अनुयायियों ने किया आस्था-स्नान

बौंसी में कड़ाके की ठंड के बीच आस्था का अद्भुत दृश्य, पापहारिणी सरोवर में सफा संप्रदाय के अनुयायियों ने किया आस्था-स्नान

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By Banka Darshan News

बौंसी। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के प्रकोप के बावजूद सफा संप्रदाय के अनुयायियों की आस्था डगमगाई नहीं। शनिवार की प्रातः बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र पापहारिणी सरोवर में विधि-विधान के साथ स्नान कर सनातन धर्म की अटूट परंपराओं का निर्वहन किया। ठंड से कंपकंपाते वातावरण में किया गया यह आस्था-स्नान श्रद्धा, तप और विश्वास का अनुपम उदाहरण बनकर सामने आया।प्रातः ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का सरोवर तट पर आगमन शुरू हो गया था। चारों ओर वैदिक मंत्रोच्चार, जयघोष और धार्मिक अनुष्ठानों का माहौल बना हुआ था। श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ पवित्र जल में स्नान कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। ठंड की तीव्रता के बावजूद श्रद्धालुओं के चेहरे पर आस्था और संतोष की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी।धार्मिक मान्यता के अनुसार, पापहारिणी सरोवर में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है तथा जीवन में शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु हर वर्ष मकर संक्रांति से पूर्व यहां पहुंचते हैं और आस्था-स्नान करते हैं। इस अवसर पर सफा संप्रदाय की गुरु माता रेखा हेंब्रम, संतों एवं वरिष्ठ अनुयायियों की विशेष उपस्थिति रही।गुरु माता रेखा हेंब्रम एवं संतों ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर वर्ष नियत तिथि पर श्रद्धालु कठिन परिस्थितियों में भी इस अनुष्ठान में भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, त्याग और आत्मशुद्धि का मार्ग है। ऐसे धार्मिक आयोजन लोगों को संयम और संस्कारों से जोड़ते हैं तथा आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं।स्थानीय नागरिकों एवं धर्मप्रेमियों ने इस आयोजन को सनातन संस्कृति की निरंतरता और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया। उनका कहना है कि आधुनिक जीवनशैली और भागदौड़ के दौर में इस तरह के धार्मिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। आस्था, परंपरा और अनुशासन के इस संगम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धा के आगे मौसम की कठोरता भी बाधा नहीं बन सकती।

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रिपोर्ट -दीपक कुमार