IMG 20260207 141911 बिहार सरकार का बड़ा फैसला: कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को मिलेगा कैशलेस इलाज, डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर लगेगी रोक

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को मिलेगा कैशलेस इलाज, डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर लगेगी रोक

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By Banka Darshan News

बिहार सरकार ने अपने कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को बड़ी राहत देते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने का फैसला किया है। राज्य के करीब 9 लाख सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी अब गंभीर बीमारी या अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी के दौरान इलाज के लिए पैसे की चिंता से मुक्त रहेंगे। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में घोषणा करते हुए राज्यकर्मियों, विधायकों और विधान पार्षदों के लिए ‘कैशलेस इलाज’ की सुविधा लागू करने का ऐलान किया।

इस फैसले के बाद बिहार सरकार के कर्मचारी भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तरह CGHS की तर्ज पर बिना किसी भुगतान के बड़े और मान्यता प्राप्त अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे। मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में अब मरीज या उनके परिजनों को अस्पताल में एडवांस राशि जमा करने की जरूरत नहीं होगी। इलाज का पूरा खर्च सीधे राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

दरअसल, विधानसभा में बड़हरा से भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप ने कर्मचारियों के इलाज के दौरान आ रही व्यावहारिक परेशानियों का मुद्दा उठाया था। इस पर जाले विधायक जीवेश मिश्रा ने भी समर्थन करते हुए कैशलेस इलाज की मांग को मजबूती से रखा। विधायकों की लगातार मांग और तर्कों को देखते हुए उपमुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था को मंजूरी दे दी। विधायकों का कहना था कि गंभीर हालत में मरीज से पहले पैसे मांगना अमानवीय है।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि बिहार सरकार पहले से ही कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना चला रही है, जिसमें इलाज के बाद खर्च की प्रतिपूर्ति की जाती है। लेकिन अब इस प्रणाली को और बेहतर बनाते हुए कैशलेस व्यवस्था लागू की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की यह योजना CGHS से भी बेहतर होगी और आने वाले समय में इसे और सशक्त बनाया जाएगा।

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स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार को लेकर एक और अहम घोषणा करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों को किसी भी परिस्थिति में प्राइवेट प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए सरकार जल्द ही ठोस नीति और एक्शन प्लान लेकर आएगी। साथ ही पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए भी नई नीति बनाई जा रही है।

इधर, विधानसभा के बाहर नीट छात्रा की मौत के मामले को लेकर सियासी माहौल गरम रहा। उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी मंत्री या उनके बेटे की भूमिका है तो नाम और सबूत सार्वजनिक करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषी पाए जाने पर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।

रिपोर्ट – दीपक कुमार सिंह