बिहार में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाण पत्र को लेकर लंबे समय से चल रही भ्रम, देरी और धांधली की शिकायतों पर अब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने नई गाइडलाइन जारी कर पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और एकरूप बनाने की दिशा में ठोस पहल की है। खास बात यह है कि अब “28 सवाल-जवाब” के फॉर्मेट में नियमों को इस तरह समझाया गया है कि आम लोगों को भी किसी बिचौलिये या अधिकारी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
दरअसल, अब तक EWS सर्टिफिकेट बनवाने के लिए लोगों को ब्लॉक ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई मामलों में अलग-अलग जिलों में नियमों की अलग व्याख्या की जाती थी, जिससे आवेदकों को परेशानी और देरी झेलनी पड़ती थी। लेकिन नई गाइडलाइन लागू होने के बाद यह स्थिति बदलने की उम्मीद है। अब डीएम से लेकर अंचल अधिकारी तक सभी को एक ही मानक पर काम करना होगा।
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि EWS सर्टिफिकेट केवल सामान्य वर्ग के उन परिवारों को मिलेगा, जिनकी वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है। इस आय में वेतन के साथ-साथ कृषि, व्यवसाय और अन्य सभी स्रोतों से होने वाली कमाई शामिल होगी। वहीं, पात्रता तय करते समय केवल पति-पत्नी और उनके आश्रित बच्चों की संयुक्त आय को ही आधार बनाया जाएगा। माता-पिता की आय को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे पहले की तरह भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी।
संपत्ति को लेकर भी अब तस्वीर पूरी तरह साफ कर दी गई है। यदि किसी के पास 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि, शहरी क्षेत्र में 1000 वर्ग फुट से बड़ा फ्लैट या निर्धारित सीमा से अधिक प्लॉट है, तो वह EWS श्रेणी का लाभ नहीं ले सकेगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्लॉट सीमा तय कर दी गई है, ताकि किसी तरह की व्याख्या की गुंजाइश न रहे।
नई व्यवस्था का सबसे अहम पहलू जवाबदेही है। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बिना पूरी जांच के कोई भी प्रमाण पत्र जारी न किया जाए। साथ ही, गलत जानकारी देकर सर्टिफिकेट बनवाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
यह पहल न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि योग्य लाभार्थियों तक योजना का फायदा सही तरीके से पहुंचाने में भी मददगार साबित होगी। अब देखना होगा कि जमीनी स्तर पर इस गाइडलाइन का कितना प्रभावी तरीके से पालन होता है।
डेक्स रिपोर्ट -पटना




