बांका के बाराहाट प्रखंड अंतर्गत मिर्जापुर, चंगेरी गांव में गुरुवार को अखिल भारतीय अंगिका महासभा के तत्वावधान में एक भव्य साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वरिष्ठ हिन्दी एवं अंगिका साहित्यकार अनिरुद्ध प्रसाद विमल के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर आधारित पुस्तक “समकालीन साहित्य और अनिरुद्ध प्रसाद विमल” का लोकार्पण रहा। इस पुस्तक का संपादन डॉ. राधेश्याम चौधरी ने किया है।

लोकार्पण समारोह में झारखंड के गोड्डा से पधारे चर्चित साहित्यकार डॉ प्रदीप प्रभात, पुस्तक के संपादक डॉ. राधेश्याम चौधरी, युवा साहित्यकार कुमार संभव, शिक्षक पंकज कुमार तथा स्वयं अनिरुद्ध प्रसाद विमल उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया।
इस अवसर पर अनिरुद्ध प्रसाद विमल भावविभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का अत्यंत सुखद और गौरवपूर्ण क्षण है, क्योंकि उनके कृतित्व पर यह दसवीं पुस्तक प्रकाशित हुई है। उन्होंने इसे किसी भी रचनाकार के जीवन का स्वर्णिम अवसर बताया।
डॉ. प्रदीप प्रभात ने विमल जी को अपना आदर्श शिक्षक एवं मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उनके साहित्य में समकालीन समाज की सजीव झलक मिलती है। युवा साहित्यकार कुमार संभव ने विमल जी के साहित्य को मानवीय मूल्यों का संवाहक बताया और कहा कि उनकी रचनाएं समय की चुनौतियों को गहराई से अभिव्यक्त करती हैं।
डॉ. राधेश्याम चौधरी ने अपने गुरु के समकालीन साहित्य पर कार्य पूर्ण करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक पंकज कुमार ने किया। समारोह ने क्षेत्र में साहित्यिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान
रिपोर्ट -अनूप कुमार




