बांका जिला के अमरपुर क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटर, निजी क्लीनिक और जांच घरों के खिलाफ प्रशासन द्वारा चलाए गए व्यापक जांच अभियान के बीच एक कथित चिकित्सीय लापरवाही का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच टीम में प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रतीक राज, रेफरल अस्पताल प्रभारी डॉ. दीप्ति सिन्हा, अस्पताल प्रबंधक ऋषि कुमार समेत कई स्वास्थ्य पदाधिकारी शामिल थे। टीम ने एक दर्जन से अधिक क्लीनिक, जांच घर एवं अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की।
छापेमारी की सूचना मिलते ही कई संस्थान बंद कर संचालक फरार हो गए, जबकि कई जगह ताला लटका मिला। जांच के दौरान आवश्यक कागजात, पंजीकरण और लाइसेंस की गहन जांच की गई। इसी क्रम में पुरानी चौक स्थित निरंजन मेडिकल हॉल एवं नर्सिंग सेंटर में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। आवश्यक मानकों के अभाव में उक्त संस्थान को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।
इसी क्षेत्र में संचालित एक निजी क्लीनिक में नवजात की मौत का मामला भी सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि एमबीबीएस डॉक्टर ए. प्रवीण द्वारा ₹30,000 लेकर गर्भवती महिला का सीजेरियन ऑपरेशन किया गया, लेकिन जन्म के कुछ घंटों बाद ही नवजात की मौत हो गई। मृत शिशु रानीकित्ता निवासी प्रीति देवी (पति – रूपेश यादव) का तीसरा बच्चा था। परिजनों के अनुसार, 9 फरवरी की शाम आशा कार्यकर्ता के कहने पर महिला को क्लीनिक में भर्ती कराया गया था और रात करीब 12 बजे ऑपरेशन हुआ। सुबह होते-होते बच्चे की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। आरोप है कि मामले को दबाने के लिए नवजात को भागलपुर रेफर कर दिया गया।
हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच की बात कही है।




