पटना। बिहार में हड़ताल पर गए राजस्व अधिकारियों के खिलाफ सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सभी अधिकारी 25 मार्च शाम 5 बजे तक हर हाल में ड्यूटी पर लौटें, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने सामूहिक अवकाश को अवैध करार देते हुए इसे जनहित के खिलाफ बताया है।
सरकार के अनुसार 9 मार्च से राजस्व सेवा के अधिकारियों का सामूहिक अवकाश पर जाना प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है। इससे आम जनता को दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) जैसे जरूरी कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, सरकार का दावा है कि व्यवस्था पूरी तरह ठप नहीं हुई है और अब तक 12 हजार से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
कार्रवाई का रोडमैप तैयार
राज्य सरकार ने सिर्फ चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि कार्रवाई की पूरी तैयारी भी कर ली है। विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, तय समयसीमा के बाद भी अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों पर ‘सेवा समाप्ति’ (सेवा टूट) की कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा वेतन कटौती और विभागीय जांच भी शुरू की जाएगी।
आधे से ज्यादा अधिकारी ड्यूटी पर
सरकार का दावा है कि हड़ताल के बावजूद 50 प्रतिशत से अधिक अधिकारी अभी भी अपने कार्य पर डटे हुए हैं। इसका असर यह है कि 12,163 दाखिल-खारिज मामलों का निष्पादन किया जा चुका है। इससे सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कुछ अधिकारियों की अनुपस्थिति से जनसेवा बाधित नहीं होने दी जाएगी।
सरकारी कार्यक्रमों पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार की सख्ती के पीछे आगामी महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ और ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ जैसे कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति जरूरी मानी जा रही है।
उपमुख्यमंत्री ने दोहराया कि जनहित और प्रशासनिक व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अब सभी की नजरें 25 मार्च की शाम पर टिकी हैं कि कितने अधिकारी काम पर लौटते हैं और कितनों पर सरकार की कार्रवाई होती है।
रिपोर्ट -बिहार डेक्स




