रिपोर्ट- हेमंत कुमार
बांका। नवरात्र की चतुर्थ रात्रि को महादेवपुर की पावन धरती पर आयोजित कवि सम्मेलन साहित्य प्रेमियों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया। कार्यक्रम में देशभर से आए कवियों ने अपनी काव्य संपदा से उपस्थित जनमानस को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन आदरणीय गुरुदेव सरोज आचार्यजी के आशीर्वाद और अंजिता गुरु माँ के स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

महादेवपुर, जो पूज्य गुरुदेव आदरणीय दिव्यानंद देव सर का गांव है, ने अतिथियों का स्वागत जिस आत्मीयता और आतिथ्य भाव से किया, उसने सभी का दिल जीत लिया। कवियों ने मंच से ही महादेवपुर के अद्भुत स्नेह और अपनत्व की प्रशंसा की। किसी ने कहा कि यदि सच्चे अर्थों में आतिथ्य देखना हो, तो महादेवपुर आना चाहिए। वहीं स्त्रियों की बराबर भागीदारी और बौद्धिक आयोजनों में उनकी सक्रिय उपस्थिति को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
काव्यपाठ के दौरान विभिन्न रसों से सजी कविताओं ने ऐसा वातावरण निर्मित किया कि मानो दर्शक दीर्घा रसज्ञों से भरी हुई हो। कविताओं पर दर्शकों की निश्छल भावनाएं और चेहरे पर उभरते भाव सिनेमा की स्क्रीन की तरह झलकते रहे। श्रोताओं का उत्साह और तन्मयता ऐसी थी मानो समय वहीं थम गया हो।
चार दौर तक चले इस फरमाइशी काव्यपाठ ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। हालांकि समय की पाबंदियों के कारण कार्यक्रम का समापन करना पड़ा, लेकिन श्रोताओं और कवियों के मन में फिर से मिलने की प्यास छोड़ गया।
अंत में सभी कवियों ने महादेवपुरवासियों, वहां के बुद्धिजीवियों और बांका की मिट्टी को प्रणाम करते हुए आभार व्यक्त किया। यह आयोजन महज एक कवि सम्मेलन नहीं, बल्कि आत्मीयता, संस्कृति और साहित्य का अनोखा संगम बनकर स्मृतियों में दर्ज हो गया।




