रिपोट-चन्दन कुमार
बांका। जिले के छह प्रखंडों के आदिवासी बहुल गांवों का कायाकल्प करने के लिए “आदि कर्मयोगी अभियान” तेज़ी से चलाया जा रहा है। यह अभियान जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की प्रमुख पहल है, जिसका लक्ष्य आदिवासी समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है।
बांका डीएम नवदीप शुक्ला के नेतृत्व में इस अभियान के तहत जिले के 138 गांवों को चिह्नित किया गया है। इन गांवों के विकास के लिए सभी विभागों के समन्वय से योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। इसके लिए डीडीसी को जिला स्तरीय नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं, डीआरडीए निदेशक श्रीनिवास ने बताया कि अभियान में कटोरिया, चांदन, बेलहर, फुल्लीडुमर, बौंसी और शंभुगंज प्रखंड शामिल हैं।
प्रशासनिक स्तर पर जिला अधिकारियों को मास्टर प्रशिक्षक और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को बीएमटी (ब्लॉक मास्टर ट्रेनर) बनाया गया है। वहीं पंचायत और गांव स्तर पर विभागीय कर्मियों, स्वयंसेवकों और स्थानीय सहयोगियों को “आदि साथी”, “आदि सहयोगी” और “आदि कर्मयोगी” की जिम्मेदारी दी गई है। अब तक 138 गांवों में 141 ग्राम नोडल, 500 से अधिक आदि सहयोगी और 1067 आदि साथी बनाए जा चुके हैं। इसके साथ ही इच्छुक लोग पोर्टल के माध्यम से भी स्वयंसेवी के रूप में जुड़ सकते हैं।
जनजातीय समुदाय को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए प्रत्येक गांव में “आदि सेवा केंद्र” की स्थापना की जा रही है। अब तक 102 आदि सेवा केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, पेयजल, बिजली और अन्य योजनाओं की जानकारी और सुविधाएं ग्रामीणों तक आसानी से पहुंचाई जाएंगी।
विशेष तौर पर 2 अक्टूबर को चिन्हित गांवों में ग्राम सभा आयोजित की जाएगी। इन सभाओं में विकास योजनाओं को पारित कर अमल में लाया जाएगा, ताकि आदिवासी समाज के उत्थान और आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।




