रिपोर्ट-माखन सिंह
बांका के बौंसी में कार्तिक मास के पवित्र स्नान के अवसर पर बुधवार को हजारों श्रद्धालु पापहारिणी सरोवर पहुंचे और आस्था के साथ स्नान व पूजा-अर्चना की। परंतु स्नान समाप्त होते ही घाटों का दृश्य पूरी तरह बदल गया। श्रद्धालुओं द्वारा छोड़ी गई गंदगी से सरोवर के घाटों की स्थिति बदतर हो गई है। घाटों पर जगह-जगह प्लास्टिक की थैलियां, पूजा सामग्री, कपड़े, फूल-मालाएं, खाद्य पदार्थों के पैकेट और थर्मोकोल की प्लेटें बिखरी नजर आ रही हैं।
सरोवर के जल में भी थर्मोकोल के थालों में दीप जलाकर प्रवाहित किए गए, जिन्हें श्रद्धालुओं ने निकालने की बजाय पानी में ही छोड़ दिया। इससे थर्मोकोल और प्लास्टिक सामग्री किनारों पर जमा हो गई है, जिससे सरोवर की सुंदरता और स्वच्छता दोनों प्रभावित हुई हैं। नगर पंचायत की ओर से सफाई की व्यवस्था की गई थी, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण सफाई कर्मियों को कचरा हटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। दोपहर तक सफाई अभियान जारी रहा, मगर पूरे घाट की सफाई नहीं हो सकी।
स्थानीय दुकानदारों और मंदार पर्वत घूमने आए लोगों ने बताया कि यह समस्या हर वर्ष कार्तिक स्नान के बाद दोहराई जाती है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए कचरा डालने की विशेष व्यवस्था की जाए और सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि गंदगी फैलने से रोका जा सके।
वहीं, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने लोगों से अपील की है कि वे आस्था के साथ-साथ स्वच्छता का भी ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि सरोवर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी अमूल्य धरोहर है। इसे स्वच्छ रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है ताकि पापहारिणी सरोवर की पवित्रता और सौंदर्य दोनों बरकरार रह सकें।




