जिला पदाधिकारी श्री नवदीप शुक्ला के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार के जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन के तहत 16 दिवसीय विशेष अभियान तथा 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत आज बांका जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शम्भुगंज में आशा कार्यकर्ताओं के साथ एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं एवं बच्चों में लैंगिक समानता की समझ बढ़ाना, जेंडर आधारित हिंसा की रोकथाम, बाल सुरक्षा कानूनों की जानकारी देना तथा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को मजबूत करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन, बांका की जिला मिशन समन्वयक द्वारा संबोधन से हुई। उन्होंने उपस्थित आशा कार्यकर्ताओं को बाल विवाह के दुष्परिणाम, संबंधित कानूनी प्रावधान, जेंडर आधारित हिंसा के प्रकार और लैंगिक भेदभाव के प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही POCSO Act के तहत बच्चों के अधिकार, सुरक्षा के उपाय तथा अपराधियों के लिए निर्धारित दंडों की विस्तृत जानकारी साझा की।
समन्वयक ने आशा कार्यकर्ताओं को प्रेरित करते हुए बताया कि गृह भ्रमण के दौरान किशोर–किशोरियों से संवाद बेहद महत्वपूर्ण है। उन्हें बाल विवाह से जुड़े जोखिम, जीवन कौशल, स्वयं की देखभाल, बचत, स्वच्छता और शिक्षा की निरंतरता के बारे में जागरूक करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि आशा कार्यकर्ता समाज के सबसे महत्वपूर्ण जमीनी स्तंभ हैं, जिनके प्रयास बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम में वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ एवं केस वर्कर अंजना भारती ने लैंगिक हिंसा की रोकथाम के प्रभावी उपायों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि हिंसा की किसी भी स्थिति में कैसे सुरक्षित रहें, तुरंत किससे सहायता लें, तथा उपलब्ध सरकारी–सामुदायिक संसाधनों का उपयोग किस प्रकार करें। उन्होंने समाज में लैंगिक समानता स्थापित करने के लिए व्यवहारिक जीवन में छोटे–छोटे बदलावों से शुरुआत करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के समापन पर जेंडर स्पेशलिस्ट मोहम्मद महबूब आलम ने सभी आशा कार्यकर्ताओं को बाल विवाह रोकथाम, जेंडर समानता और लैंगिक हिंसा के खिलाफ शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि जब तक समाज की सोच नहीं बदलेगी, तब तक परिवर्तन अधूरा रहेगा। अतः जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता उपस्थित रहीं और उन्होंने बाल अधिकारों एवं महिला सशक्तिकरण के इस अभियान को अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावी रूप से लागू करने का संकल्प लिया।
रिपोर्ट -चन्दन कुमार




