IMG 20251125 095855 बांका में करोड़ों खर्च के बाद भी नल-जल योजना ठप, 3000 से अधिक लोग प्रभावित 

बांका में करोड़ों खर्च के बाद भी नल-जल योजना ठप, 3000 से अधिक लोग प्रभावित 

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By Banka Darshan News

रिपोर्ट-अनूप कुमार

बांका जिले के बाराहाट प्रखंड अंतर्गत मिर्जापुर पंचायत के चंगेरी और मिर्जापुर गांवों में बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल-जल योजना पूरी तरह पटरी से उतरती दिखाई दे रही है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद आज भी अधिकांश घरों तक नल के माध्यम से पानी नहीं पहुंच पा रहा है। चंगेरी गांव के वार्ड 2, 3 और 4 में लगभग पाँच वर्ष पहले पाइपलाइन तो बिछा दी गई थी, लेकिन अब तक एक बूंद भी नल से पानी नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी से कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई पहल नहीं की गई।

 

मिर्जापुर गांव के वार्ड 5 और 6 की स्थिति भी दयनीय है, जहां पिछले तीन महीनों से जलमिनार से आपूर्ति पूरी तरह बंद है। इससे लोग बोतलबंद पानी खरीदने या हैंडपंप और स्थानीय जलस्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। योजना का वास्तविक लाभ न मिलने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि पाइपलाइन कहीं टूटी है, कहीं जाम है और कई जगह मोटर व आपूर्ति व्यवस्था ही बंद पड़ी है। इस कारण लगभग तीन हजार की आबादी पानी संकट से जूझ रही है।

 

स्थानीय ग्रामीण रामदयाल बिंद, बबलू मंडल, विवेक कुमार, दशरथ साह और कृष्ण देव बिंद ने बताया कि मिर्जापुर स्थित पानी टंकी से पहले चंगेरी और मिर्जापुर दोनों गांवों को जलापूर्ति होती थी, लेकिन अब यह सीमित होकर केवल वार्ड 5 और 6 तक रह गई है। उधर भी पिछले तीन महीने से पानी नहीं आ रहा है। कई घरों में नल सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह योजना कागजों में ही चल रही है, जमीनी स्तर पर इसका कहीं प्रभाव नहीं दिखता।

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ग्रामीणों में बढ़ते आक्रोश का कारण यह है कि 2015 में पीएचईडी द्वारा जब आपूर्ति शुरू की गई थी, तब शुरुआती कुछ महीने स्थिति ठीक रही। लेकिन एक-दो महीने बाद ही व्यवस्था चरमराने लगी। उनका कहना है कि इतने बड़े खर्च की जगह यदि हर टोले में 2–4 चापाकल लगा दिए जाते, तो आज यह संकट नहीं होता। मिथिलेश कापरी, अनिल यादव और राजेंद्र यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि 10 वर्षों से पाइपलाइन की खराबी की मरम्मत तक नहीं कराई गई। सरकार ने पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन पानी गांव तक नहीं पहुंचा।

 

ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द सर्वे कर वास्तविक समस्या की पहचान करे, पाइपलाइन की मरम्मत, लीक को ठीक करने तथा नई बोरिंग की व्यवस्था करे। उनका कहना है कि जब तक विभाग ईमानदारी से काम नहीं करेगा, तब तक नल-जल योजना केवल कागजों में ही चलती रहेगी और ग्रामीण पीने के पानी के लिए भटकते रहेंगे।