बांका के पंजवारा बाजार में शनिवार को उर्वरक दुकानों की जांच को लेकर हड़कंप मच गया। सहायक निदेशक रसायन कृष्णकांत ने पंजवारा बाजार स्थित विभिन्न उर्वरक दुकानों का औचक निरीक्षण कर स्टॉक पंजी, बिक्री अभिलेख एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों का अवलोकन किया। जांच की भनक लगते ही कई खाद विक्रेताओं ने अपनी दुकानें बंद कर दीं और मौके से फरार हो गए, जिससे उर्वरक बिक्री में बड़े पैमाने पर अनियमितता की आशंका और गहरा गई है।
जांच के दौरान सहायक निदेशक ने कई दुकानों के स्टॉक पंजी और बिक्री रजिस्टर की जांच की, जिसमें अनेक खामियां पाई गईं। कई दुकानों में अभिलेख अधूरे थे तो कहीं स्टॉक और बिक्री का मिलान सही नहीं पाया गया। सरस्वती कृषि केंद्र में संचालक मंटू भगत जांच के दौरान मौजूद पाए गए, जबकि मेसर्स संजय भगत, भगत कृषि केंद्र और योगेंद्र कृषि केंद्र के संचालक जांच के समय अनुपस्थित रहे। अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित दुकानों का विवरण दर्ज किया।
अधिकारी ने बताया कि प्राथमिक जांच में उर्वरक वितरण और रिकॉर्ड संधारण में अनियमितताओं के स्पष्ट संकेत मिले हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर और सही दर पर खाद उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, स्टॉक छिपाने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सहायक निदेशक ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में पुनः औचक निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले उर्वरक विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बताया जा रहा है कि उर्वरक की कालाबाजारी और रिकॉर्ड में हेराफेरी के कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। समय पर खाद नहीं मिलने से खेती प्रभावित होती है और किसानों को मजबूरी में अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। वहीं, कुछ उर्वरक विक्रेताओं द्वारा सीमावर्ती झारखंड के गोड्डा जिले में स्टॉक छिपाकर रखने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिसकी जांच विभाग द्वारा की जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद पंजवारा बाजार के उर्वरक कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। कई दुकानदार अपने कागजात दुरुस्त करने में जुट गए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि किसानों के हित में यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।




