बांका जिला के शंभुगंज प्रखंड के बेलारी गांव में शनिवार की सुबह अचानक लगी आग ने तीन किसानों के सपनों को राख में बदल दिया। खलिहान में रखे धान के पुंज में लगी इस भीषण आग में करीब ढाई लाख रुपये मूल्य का धान जलकर खाक हो गया। घटना के दौरान उठे धुएँ और लपटों को देखकर ग्रामीण शोर मचाते हुए मौके पर दौड़े और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि सूचना पर फायर ब्रिगेड वाहन भी गांव पहुंचा, लेकिन तब तक ग्रामीण स्थिति को नियंत्रित कर चुके थे।
जानकारी के अनुसार, बेलारी गांव के तीन किसानों ने विभिन्न खेत मालिकों की जमीन लेकर धान की खेती कर रहे थे। सुभाष चंद्र झा की जमीन पर श्याम मांझी, सिंटू झा की जमीन पर तेतर दास तथा सुधांशु झा उर्फ मोती झा की जमीन पर रूपन यादव खेती करते थे। तीनों किसानों ने इस वर्ष लगभग 10 बीघा से अधिक रकबा पर धान की फसल तैयार की थी। धान की कटाई के बाद उसे खलिहान में एकत्र कर सुखाने और मड़ाई की तैयारी की जा रही थी कि शनिवार की सुबह अचानक अज्ञात कारणों से धान के पुंज में आग लग गई।
आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में तीनों किसानों का पूरा धान जलकर राख हो गया। पीड़ित किसानों—श्याम मांझी, तेतर दास और रूपन यादव—ने बताया कि उन्होंने महाजन से कर्ज लेकर फसल तैयार की थी। पूरी उम्मीद थी कि इस बार अच्छी पैदावार से कर्ज उतार पाएंगे और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, लेकिन अचानक लगी इस आग ने उनके सारे सपनों पर पानी फेर दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही अंचल प्रशासन को सूचित किया गया। अंचलाधिकारी जुगनू रानी ने बताया कि धान पुंज जलने की सूचना प्राप्त होते ही हल्का कर्मचारी को जांच के लिए मौके पर भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति को कुछ राहत मिल सके। घटना के बाद पीड़ित परिवारों में निराशा और दुख का माहौल है। गांव के लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए खलिहान क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता उपाय किए जाने चाहिए।
रिपोर्ट -निवास कुमार सिंह




