बांका जिले में फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगे वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसने प्रशासन और ट्रैफिक विभाग की चिंता बढ़ा दी है। शहर से लेकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक इस समस्या का दायरा फैलता जा रहा है। पटना ट्रैफिक मुख्यालय के निर्देश के बाद जिले के सभी एनएच और स्टेट हाईवे पर हाईवे पेट्रोलिंग वाहनों की तैनाती की गई है। इनमें लगे रडार गन और नंबर प्लेट स्कैनर ओवरस्पीड वाहनों को ऑटो स्कैन कर ऑनलाइन चालान जनरेट करते हैं। लेकिन इसी तकनीक का दुरुपयोग अब अपराधियों द्वारा फर्जी नंबर प्लेट लगाकर किया जा रहा है, जिससे सिस्टम भी भ्रमित हो रहा है।
हाल ही में कटोरिया-जयपुर मार्ग पर एक दिलचस्प मामला सामने आया। एक वाहन मालिक को चालान का मैसेज मिला, जबकि उसका दावा था कि उस दिन वाहन घर से बाहर निकला ही नहीं था। जांच में पता चला कि अलीगंज रोड से लकड़ीकोला की ओर जा रही एक तेज रफ्तार बाइक पर वही रजिस्ट्रेशन नंबर लगा था जो उस वाहन का था। सिस्टम ने स्पीड पकड़कर चालान जनरेट कर दिया और मैसेज असली मालिक के पास चला गया। यह मामला बताता है कि गलत और फर्जी नंबर प्लेट का चलन किस तरह तकनीक आधारित व्यवस्था को चुनौती दे रहा है।
ट्रैफिक विभाग के अनुसार, यह सिर्फ चालान से बचने का हथकंडा नहीं है बल्कि कई गंभीर आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा है। बांका जिला झारखंड के सीमावर्ती इलाकों से जुड़ा है, जिससे तस्करी और अपराधियों के आने-जाने में आसानी होती है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कई आपराधिक गिरोह शराब की तस्करी, आपराधिक वारदात और पुलिस की नजर से बचने के लिए फर्जी नंबर प्लेट लगे वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। चोरी की गाड़ियों पर भी दूसरे वाहनों के नंबर चिपकाकर उन्हें खुला घुमाया जा रहा है, जिससे पहचान मुश्किल हो जाती है।
स्थिति को गंभीर मानते हुए यातायात डीएसपी नीरज कुमार ने अधिकारियों के साथ बैठक कर विशेष अभियान चलाने का आदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि फर्जी नंबर प्लेट लगे वाहनों को तुरंत सीज किया जाएगा और संबंधित वाहन मालिक या चालक के खिलाफ बीएनएसएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज होगा।
फर्जी नंबर प्लेट की समस्या पर रोक लगाने के लिए एचएसआरपी (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट) सबसे प्रभावी विकल्प माना जा रहा है। एचएसआरपी में विशेष लेजर कोडिंग, क्यूआर कोड और लॉकिंग सिस्टम होता है, जिसे हटाना या कॉपी करना लगभग असंभव है। ट्रैफिक स्कैनर और मोबाइल ऐप के जरिए ऐसी प्लेटों की जानकारी सीधे आरटीओ डेटाबेस से मिलान की जाती है, जिससे चोरी, डुप्लीकेट नंबर और फर्जीवाड़े पर रोक लगती है।
चिंता की बात यह है कि शहर में केवल 30 प्रतिशत वाहनों पर ही एचएसआरपी लगी है, जबकि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 192(ए) के तहत अप्रैल 2019 से यह अनिवार्य है। नियम उल्लंघन पर 500 से 5000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
ट्रैफिक थाना अध्यक्ष दिनेश वर्मा ने कहा कि अब हर प्रमुख चौक, बाजार, स्कूल क्षेत्र और शहर के प्रवेश मार्गों पर वाहनों की कड़ी जांच की जाएगी। सही कागजात प्रस्तुत न करने पर वाहन जब्त किया जाएगा, और फर्जी नंबर प्लेट मिलने पर चोरी व धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया जाएगा।
प्रशासन की इस सख्ती से उम्मीद जताई जा रही है कि फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर वाले वाहनों पर अंकुश लगेगा और शहर की यातायात व्यवस्था अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बन सकेगी। अब बांका पुलिस का संदेश साफ है—नियम तोड़ने वालों के लिए सड़कें नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।




