बांका जिले के कटोरिया प्रखंड में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत 150 हेक्टेयर क्षेत्र में क्लस्टर आधारित प्राकृतिक खेती कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में कुल 375 महिला किसान जुड़ी हुई हैं, जो बिना रासायनिक उर्वरकों के प्राकृतिक तरीके से खेती कर आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की मिसाल पेश कर रही हैं। इन्हीं किसान दीदियों को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती से महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सहायक निदेशक (रसायन) डॉ. कृष्ण कांत ने की तथा उद्घाटन बांका जिला किशोर न्याय परिषद की प्रधान दंडाधिकारी श्रीमती नीलम कुमारी द्वारा किया गया। इसमें 400 से अधिक महिला किसानों ने भाग लिया। प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों के साथ-साथ मशरूम उत्पादन, सेनेटरी पैड निर्माण, चाउमीन निर्माण आदि स्वरोजगार से जुड़ी महिला उद्यमियों ने अपने-अपने उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई, जिससे ग्रामीण महिलाओं के बढ़ते उद्यमशीलता प्रयासों का प्रदर्शन हुआ।

कृषि विभाग के उपनिदेशक (अभियंत्रण) और जिला उद्यान पदाधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। डॉ. कृष्ण कांत ने बताया कि पूरे जिले में प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 9 क्लस्टर बनाकर कुल 1125 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इस पद्धति में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बिल्कुल नहीं होता। किसान स्वयं गाय के गोबर और गोमूत्र से जीवामृत, घनजीवामृत, हाथीखाद, नैनो कंपोस्ट और वर्मी कंपोस्ट तैयार करते हैं तथा कई किसान स्थानीय स्तर पर इसकी बिक्री कर आर्थिक रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सम्मानित कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना था। सभी महिला किसानों व उद्यमियों को गमछा और सेनेटरी पैड पैकेट देकर सम्मानित किया गया तथा जैविक खेती के महत्व और इसके भविष्य में मिलने वाले आर्थिक लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस क्षेत्र में आदिवासी महिलाएँ शिमला मिर्च, नींबू, टमाटर, ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों तथा रेशम उत्पादन में भी उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं।कार्यक्रम में स्थानीय तथा बांका जिले से आई बच्चियों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। प्रस्तुति देने वाली टीमों को प्रोत्साहन स्वरूप पाँच-पाँच हजार रुपये प्रदान किए गए।

डॉ. कृष्ण कांत ने जानकारी दी कि दिसंबर माह में जिले के विभिन्न प्रखंडों में ऐसे 5 और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों से मिट्टी के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति किसानों एवं आमजन को सजग करना है।यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और आर्थिक उन्नति की दिशा में भी एक सराहनीय कदम है।
रिपोट -चन्दन कुमार




