IMG 20251128 153239 बिहार में जारी होगा धार्मिक कैलेंडर, सनातन धर्म के प्रचार के लिए सभी जिलों में होंगे संयोजकराजगीर में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारी, मंदिरों-मठों में होगी विशेष व्यवस्था.

बिहार में जारी होगा धार्मिक कैलेंडर, सनातन धर्म के प्रचार के लिए सभी जिलों में होंगे संयोजकराजगीर में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारी, मंदिरों-मठों में होगी विशेष व्यवस्था.

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By Banka Darshan News

 

पटना। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद (बीएसआरटीसी) ने राज्य में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को संगठित रूप देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की घोषणा की है। परिषद के अध्यक्ष रणबीर नंदन ने बताया कि परिषद जल्द ही एक धार्मिक कैलेंडर जारी करेगी, जिसे राज्य के सभी पंजीकृत मंदिरों और मठों के माध्यम से वितरित किया जाएगा। कैलेंडर में पूरे वर्ष के प्रमुख धार्मिक आयोजनों, व्रत-त्योहारों तथा मंदिर गतिविधियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

 

नंदन ने बताया कि परिषद आने वाले महीनों में राजगीर में सनातन धर्म पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी भी कर रही है। सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर स्थापित करना है। परिषद चाहती है कि बिहार आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरे।

 

राज्य में मौजूद पंजीकृत धार्मिक स्थलों की संख्या 2,499 है। इन मंदिरों और मठों की गतिविधियों पर नियमित निगरानी और समन्वय बनाए रखने के लिए परिषद ने बिहार के सभी 38 जिलों में संयोजक नियुक्त करने का निर्णय लिया है। विशेष रूप से, संयोजक केवल महंतों अथवा मुख्य पुजारियों में से ही चुने जाएंगे। चयन प्रक्रिया एक-दो दिनों में शुरू हो जाएगी। हर संयोजक अपने जिले के सभी मंदिरों और मठों के महंतों से समन्वय बनाते हुए धार्मिक कार्यक्रमों के संचालन की जिम्मेदारी संभालेगा।

 

संयोजकों को कई महत्वपूर्ण कार्य सौंपे जाएंगे। इनमें प्रमुख है—यह सुनिश्चित करना कि उनके जिले के सभी पंजीकृत मंदिर और मठ पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण कथा तथा अमावस्या के दिन भगवती पूजा अवश्य आयोजित करें। साथ ही, वे जनता को इन पूजाओं के महत्व के बारे में जागरूक करेंगे और लोगों को अपने घरों में भी मासिक पूजा करने के लिए प्रेरित करेंगे।

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परिषद ने अखाड़ों के लिए भी विशेष व्यवस्था की घोषणा की है। सभी धार्मिक स्थलों में शारीरिक संस्कृति के अभ्यास के लिए अखाड़ों हेतु समर्पित स्थान बनाया जाएगा। नंदन के अनुसार, मंदिरों-मठों की भूमिका केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें सामाजिक गतिविधियों, लोकसंस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सुधार के प्रयासों में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि बिहार की धार्मिक परंपराएँ, पूजा-पद्धतियाँ और त्योहार—विशेषकर छठ—पारिस्थितिक संतुलन, सामुदायिक सहभागिता और भक्ति की अद्वितीय मिसाल हैं। परिषद की ये पहलें राज्यभर में सनातन धर्म की समृद्ध परंपरा को नई ऊर्जा और दिशा देने की ओर महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

 

रिपोर्ट -कुंदन कुमार