IMG 20250814 WA0046 रोड बनवाइए नहीं तो नहीं मिलेगा वोट, नेताओं से गुस्साए लोगों ने खूब किया हंगामा

रोड बनवाइए नहीं तो नहीं मिलेगा वोट, नेताओं से गुस्साए लोगों ने खूब किया हंगामा

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By News Desk

नवगछिया प्रखंड के जपतेली गांव में सड़क निर्माण को लेकर लंबे समय से उपेक्षित ग्रामीणों का सब्र आखिर टूट गया। गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर उतरे और जोरदार प्रदर्शन करते हुए “रोड नहीं तो वोट नहीं” के नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने ऐलान किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में वे पूरी तरह वोट का बहिष्कार करेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह सड़क बन जाती, तो भागलपुर और नवगछिया तक पहुंचने में उन्हें काफी सुविधा मिलती और समय की बचत होती। वर्तमान में सड़क न होने के कारण उन्हें करीब 8 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। यह समस्या केवल समय की बर्बादी तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी आपातकालीन स्थिति—जैसे बीमारी, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाना या दुर्घटना—के दौरान यह देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय राजनीतिक प्रतिनिधि गांव में आकर बच्चों तक के सामने वादा करते हैं कि सड़क बना दी जाएगी, लेकिन जीतने के बाद कोई सांसद या विधायक दोबारा गांव का रुख नहीं करता। इस कारण ग्रामीणों का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है।

उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण के लिए कई बार जिला प्रशासन को आवेदन दिया गया, लेकिन हाल ही में जिलाधिकारी की ओर से यह जवाब मिला कि गांव में पहले से 4 सड़कें जाती हैं, इसलिए नई सड़क की आवश्यकता नहीं है। इस जवाब से ग्रामीण बेहद आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि जो सड़कें हैं, वे उनकी जरूरत पूरी नहीं करतीं और जिस मार्ग की मांग हो रही है, वह रोजमर्रा की आवाजाही और आपातकालीन स्थितियों में बेहद जरूरी है।

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प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने गांव-गांव जाकर अन्य लोगों को भी आंदोलन से जोड़ने का अभियान चलाया। वे चाहते हैं कि यह विरोध केवल उनके गांव तक सीमित न रहे, बल्कि आसपास के प्रभावित गांव भी इस मुहिम में शामिल हों।

जपतेली गांव की यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि विकास और चुनावी वादों के बीच अब भी गहरी खाई मौजूद है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, वे अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगे। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक सड़क का मामला नहीं है, बल्कि सम्मान, विश्वास और बुनियादी अधिकारों की लड़ाई है।

ग्रामीणों के इस आंदोलन ने प्रशासन और राजनीतिक दलों के लिए एक स्पष्ट संदेश दे दिया है—वोट अब केवल वादों पर नहीं, बल्कि वास्तविक विकास कार्यों पर मिलेगा। अगर समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो यह विरोध चुनावी परिणामों पर सीधा असर डाल सकता है।