80 प्रतिशत अनुदान पर किसानों को मिलेगा गरमा मक्का का बीज, बांका में 150 क्व
बांका। धान की कटाई के साथ ही जिले में रबी फसल की शुरुआत हो चुकी है। इसी क्रम में कृषि विभाग द्वारा गरमा खेती को बढ़ावा देने की तैयारी भी तेज कर दी गई है। किसानों की आय बढ़ाने और गैर पारंपरिक क्षेत्रों में मक्का उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभाग की ओर से 80 प्रतिशत अनुदान पर गरमा मक्का का बीज उपलब्ध कराया जाएगा। यह योजना “पहले आओ, पहले पाओ” की तर्ज पर लागू की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में चतुर्थ कृषि रोड मैप के तहत राष्ट्रीय खाद्य एवं पोषण सुरक्षा योजना के अंतर्गत कोर्स सिरियल (गरमा मक्का) गैर पारंपरिक क्षेत्र में मक्का विस्तार उत्पादन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत बिहार के 12 चिह्नित जिलों में बड़े पैमाने पर गरमा मक्का की खेती कराई जाएगी, जिसमें बांका जिला भी शामिल है। बांका जिले के लिए कुल 150 क्विंटल गरमा मक्का बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत किसानों को मक्का बीज पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। अधिकतम 15 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान का भुगतान किया जाएगा। यदि प्रति किलोग्राम के हिसाब से देखा जाए तो किसानों को 150 रुपये प्रति किलो तक की सहायता राशि मिलेगी। विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले बीज नये एवं अधिसूचित उच्च उपज देने वाले होंगे। ये बीज जलवायु अनुकूल, जैव संवर्धित तथा कीट एवं रोग प्रतिरोधी गुणों से युक्त होंगे, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन मिलने की उम्मीद है।
योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसानों के साथ-साथ महिला किसानों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। एक किसान को अधिकतम पांच एकड़ भूमि के लिए ही बीज पर अनुदान का लाभ दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसानों तक योजना का लाभ पहुंच सके।
जिला कृषि पदाधिकारी त्रिपुरारी शर्मा ने बताया कि गरमा मक्का बीज योजना का लाभ “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर दिया जाएगा। इसके लिए किसानों को कृषि विभाग के विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा। आवेदन स्वीकृत होने के बाद किसानों को अनुदानित दर पर बीज उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और गरमा मक्का की खेती को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि करें। विभाग का मानना है कि इस पहल से न केवल मक्का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों को वैकल्पिक फसल के रूप में बेहतर आर्थिक लाभ भी मिलेगा।
रिपोर्ट -दीपक कुमार




