IMG 20260109 214330 मंदार तराई में सफा पंथ के अनुयायियों की साधना, श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत हुआ क्षेत्र

मंदार तराई में सफा पंथ के अनुयायियों की साधना, श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत हुआ क्षेत्र

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By Banka Darshan News

मंदार तराई क्षेत्र इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां सफा पंथ के अनुयायी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ खुले वातावरण में, विशेषकर पेड़ों के नीचे, धार्मिक अनुष्ठान करते नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को भी बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से सैकड़ों की संख्या में सफा पंथ के अनुयायी मंदार तराई पहुंचे और विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ व साधना में लीन रहे।प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे मंदार तराई क्षेत्र में हो रहे इन अनुष्ठानों से पूरा इलाका श्रद्धा और भक्ति के भाव से ओतप्रोत हो गया है। बरगद, पीपल और अन्य विशाल वृक्षों के नीचे बैठे अनुयायी घंटों तक ध्यान, पूजा और धार्मिक कर्मकांड संपन्न कर रहे हैं। मान्यता है कि प्रकृति के सानिध्य में की गई साधना अधिक फलदायी होती है और आत्मिक शांति प्रदान करती है। इसी आस्था के कारण सफा पंथ के अनुयायी मंदिरों की बजाय खुले स्थानों और वृक्षों के नीचे अनुष्ठान करना अधिक उपयुक्त मानते हैं।

अनुष्ठान के दौरान सफा पंथ के अनुयायी पारंपरिक वस्त्र धारण किए हुए नजर आए। पूजा-पाठ के साथ-साथ सामूहिक ध्यान और मंत्रोच्चारण से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। दूर-दराज से आए श्रद्धालु पूरी निष्ठा के साथ साधना में जुटे रहे। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दृश्य हर वर्ष मकर संक्रांति और बौंसी मेला के आसपास देखने को मिलता है, जब सफा पंथ के अनुयायी कई दिनों तक मंदार तराई में प्रवास कर साधना करते हैं।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सफा पंथ के अनुयायियों के आगमन से क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। इससे न केवल धार्मिक माहौल बनता है, बल्कि मंदार क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी और अधिक सशक्त होती है। साधना और अनुष्ठान के दौरान अनुयायी अनुशासन और शांति का विशेष ध्यान रखते हैं, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न नहीं होती।प्रशासन की ओर से भी श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक और पुलिस बल की तैनाती की गई है। साथ ही साफ-सफाई और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी ध्यान रखा जा रहा है, ताकि अनुष्ठान शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।मंदार तराई में सफा पंथ के अनुयायियों की यह साधना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि यह क्षेत्र की परंपरा, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव को भी दर्शाती है। श्रद्धा, साधना और प्रकृति के संगम से मंदार तराई एक बार फिर आध्यात्मिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान को मजबूत करता नजर आ रहा है।

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रिपोर्ट -दीपक कुमार