IMG 20251123 223156 मधुसूदन मंदिर में नवान्न पर्व धूमधाम से सम्पन्न, दही-चूड़ा-गुड़ का भोग लगाकर श्रद्धालुओं ने जताई आस्था

मधुसूदन मंदिर में नवान्न पर्व धूमधाम से सम्पन्न, दही-चूड़ा-गुड़ का भोग लगाकर श्रद्धालुओं ने जताई आस्था

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By Banka Darshan News

रिपोर्ट-माखन सिंह

अंग और मंदार क्षेत्र में लोक आस्था का प्रमुख पर्व नवान्न रविवार को बड़ी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सैकड़ों की संख्या में भक्त सुबह से ही नगर और प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में पहुंचकर अपने-अपने इष्टदेव को नए अन्न का प्रसाद अर्पित करते रहे। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में कृषि परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला।

 

मुख्य आकर्षण ऐतिहासिक व पौराणिक मधुसूदन मंदिर रहा, जहां सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। भगवान मधुसूदन को परंपरागत रूप से दही, चूड़ा, गुड़ और केला का भोग लगाया गया। मंदिर में सबसे पहले भगवान का पंचामृत स्नान कराया गया और फिर उन्हें नए वस्त्र पहनाए गए। इसके बाद विधि-विधान से पूजा शुरू हुई, जिसमें पुजारी द्वारा विशेष अनुष्ठान किया गया और श्रद्धालुओं ने पूरे भाव से भगवान की आराधना की।

 

नवान्न पर्व अगहन माह के शुक्ल पक्ष पंचमी को मनाया जाता है। पारंपरिक मान्यता है कि धान की नई फसल तैयार होने पर सबसे पहले उसका अन्न भगवान और इष्टदेव को समर्पित किया जाता है। माना जाता है कि भगवान को पहला अन्न अर्पित करने से वर्षभर घर-परिवार और किसानों पर सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसी परंपरा को निभाते हुए लोगों ने बाजारों में दही, चूड़ा, गुड़, केला, मूली आदि सामान की जमकर खरीदारी की।

घरों में भी इस पर्व का विशेष महत्व देखा गया। लोगों ने अपने कुलदेवता और कुलदेवी की विधि-विधान से पूजा की तथा नए अन्न का भोग लगाया। कई स्थानों पर माता अन्नपूर्णा, धरती माता और पितरों को भी अन्न अर्पित करने की परंपरा निभाई गई।

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सामाजिक कार्यकर्ता निर्मल झा और पंडित अवधेश ठाकुर ने बताया कि नवान्न केवल नया अन्न चढ़ाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी मिट्टी, कृषि परंपरा और संस्कृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का उत्सव है। किसान अपनी मेहनत की उपज का प्रथम अंश जब भगवान मधुसूदन को अर्पित करते हैं, तभी वर्षभर की मंगलकामना, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

नवान्न पर्व ने पूरे क्षेत्र को भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव से भर दिया।