बांका। सफलता और कामयाबी का कोई शॉर्टकट नहीं होता, लेकिन जल्द अमीर बनने की लालच में जिले का युवा वर्ग तेजी से अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी के दलदल में फंसता जा रहा है। बीते कुछ वर्षों में जिले में इस गैरकानूनी कारोबार ने जिस तेजी से पांव पसारे हैं, वह अब गंभीर सामाजिक चिंता का विषय बन चुका है। खासकर युवा पीढ़ी बिना मेहनत किए रातों-रात अमीर बनने का सपना देख रही है, जिसके चलते वे अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं।
कटोरिया थाना क्षेत्र के कड़वामारण गांव में हाल ही में हुई पुलिस छापेमारी ने इस गोरखधंधे की भयावहता को उजागर कर दिया है। यह मामला अब केवल गिरफ्तारी और बरामदगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे जिले में सक्रिय संगठित ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क की ओर इशारा मिल रहा है। पुलिस छापेमारी के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन और लैपटॉप इस पूरे मामले के सबसे अहम सबूत माने जा रहे हैं।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल और लैपटॉप जैसे डिजिटल उपकरणों में कॉल डिटेल, व्हाट्सएप चैट, ई-मेल, सोशल मीडिया अकाउंट, बैंकिंग एप, यूपीआई, ई-वॉलेट और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित रहते हैं। यदि पुलिस इन उपकरणों की गहन फॉरेंसिक जांच कराती है, तो न केवल वर्तमान मामले की सच्चाई सामने आएगी, बल्कि इससे जुड़े अन्य अपराधों और आरोपियों की कड़ियां भी उजागर हो सकती हैं।
बताया जाता है कि इस तरह के अपराधों में फर्जी सिम कार्ड, कई मोबाइल फोन और अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है। सट्टेबाज गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर उनके नाम पर सिम कार्ड और बैंक खाते खुलवाते हैं। इन खातों के जरिए हर महीने लाखों रुपये का लेन-देन किया जाता है। तकनीकी जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि पैसा किन खातों से आया और किन खातों में गया, जिससे फरार आरोपियों और पर्दे के पीछे बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इससे यह भी पता चल सकता है कि यह नेटवर्क स्थानीय है या इसके तार जिला, राज्य अथवा अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े हैं।
बताया जाता है कि आज लगभग हर गांव में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। सैकड़ों युवा इसमें कर्मचारी के रूप में जुड़े हुए हैं, जिन्हें 20 हजार से 50 हजार रुपये मासिक भुगतान किया जाता है। कोई वेबसाइट मेंटेन करता है तो कोई नए ग्राहक जोड़ने का काम करता है।
आईपीएल और महिला आईपीएल के दौरान यह अवैध सट्टेबाजी अपने चरम पर पहुंच जाती है। आने वाले पुरुष टी-20 वर्ल्ड कप को लेकर भी सट्टेबाज सक्रिय हो गए हैं। टॉस, मैच विजेता, बल्लेबाजी या फील्डिंग जैसे हर पहलू पर दांव लगाए जाते हैं। इसमें कुछ युवा अचानक पैसे कमा रहे हैं, तो कई अपनी जमा पूंजी गंवा रहे हैं। चिंता की बात यह भी है कि इस अपराध में 18 वर्ष से कम उम्र के किशोर भी शामिल हो रहे हैं। ऐसे में युवाओं को इस जाल से बचाना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन चुका है।
रिपोर्ट -दीपक कुमार




