IMG 20251228 WA0430 1800 करोड़ रुपये की गंगा जल उद्वह योजना से मुंगेर, भागलपुर और बांका के खेतों को मिलेगा नया जीवन

1800 करोड़ रुपये की गंगा जल उद्वह योजना से मुंगेर, भागलपुर और बांका के खेतों को मिलेगा नया जीवन

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By Banka Darshan News

बिहार में गंगा जल अब केवल बांका की धरती को ही नहीं, बल्कि मुंगेर और भागलपुर के खेतों को भी सिंचाई के लिए नई ताकत देगा। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी गंगा जल उद्वह योजना अब धरातल पर उतरती दिख रही है। 1800 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस योजना का कार्य बदुआ डैम के पास तेजी से चल रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले घोषित इस परियोजना को लेकर जहां लोगों में संदेह था, वहीं अब चुनाव के बाद इसके क्रियान्वयन से किसानों में उम्मीद की नई किरण जगी है।

इस योजना के तहत अजगैवीनाथ धाम से बेलहर प्रखंड स्थित बदुआ हनुमाना डैम तक करीब 56 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। चार से पांच फीट व्यास के मजबूत स्टील पाइपों के जरिए गंगाजल को लिफ्ट सिस्टम से फिल्टर कर डैम तक पहुंचाया जाएगा। गंगाजल के भंडारण के लिए बिजीखरबा सिंचाई प्रमंडल परिसर में 10 फीट गहरा और 34 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल का एक विशाल तालाब बनाया जा रहा है, जिसकी आरसीसी ढलाई होगी। बीते 15 दिनों से तालाब की खुदाई और पाइप बिछाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

योजना के तहत तारापुर क्षेत्र में भी गंगाजल का भंडारण किया जाएगा। वहां से करीब 25 किलोमीटर पाइपलाइन के माध्यम से हवेली खड़गपुर के डैम तक जल पहुंचाया जाएगा। इसके बाद बेलहर के बेलहरना और फुल्लीडुमर प्रखंड के कोझी डैम तक भी गंगाजल ले जाने की योजना है। इससे हजारों एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई संकट से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।

हनुमाना डैम से वर्तमान में लगभग 48 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है, लेकिन 422 फीट से नीचे जलस्तर जाने पर डैम मृतप्राय हो जाता है। बेलहर और शंभूगंज प्रखंड की करीब 22,195 हेक्टेयर भूमि तथा मुंगेर जिले के संग्रामपुर और तारापुर प्रखंड की लगभग 23 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचाई पर निर्भर है। गंगाजल पहुंचने से इन क्षेत्रों में खेती की संभावनाएं और उत्पादकता दोनों बढ़ेंगी।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पूर्व में डक्ट स्कीम के तहत सिंचाई संकट दूर करने की घोषणा की गई थी, जो साकार नहीं हो सकी। अब गंगाजल को सीधे डैम तक पहुंचाकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 के अंत तक इस महत्वाकांक्षी योजना को पूर्ण करना है। निर्माण कार्य की रफ्तार देखकर किसानों में खुशी की लहर है और आने वाले समय में सिंचाई संकट से मुक्ति की उम्मीद मजबूत होती जा रही है।