Screenshot 20250814 095329 बाढ़ के पानी से त्राहिमाम; लेकिन सुनने वाला कोई नहीं, इंसान के साथ पशु के आंखों से टपक रहा दर्द का आंसु 

बाढ़ के पानी से त्राहिमाम; लेकिन सुनने वाला कोई नहीं, इंसान के साथ पशु के आंखों से टपक रहा दर्द का आंसु 

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By News Desk

पटना डेस्क; कटिहार, गंगा और कारी कोशी नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि ने बरारी विधानसभा क्षेत्र में तबाही मचा दी है। तेज बहाव और उफान के कारण पानी गांवों और घरों में घुस चुका है। इससे लोग अपने घर-बार छोड़कर सड़क किनारे या ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। खेत, मवेशी और रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीजें सब पानी में डूब गई हैं।

सबसे अधिक असर समेली प्रखंड के मुरादपुर, पश्चिमी चांदपुर, छोआर सहित कई पंचायतों में देखा जा रहा है। यहां कारी कोशी नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है, जिससे लगभग दो हजार से अधिक आबादी बुरी तरह प्रभावित हुई है। गांवों में बिजली, पीने के पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था नहीं है, जिससे किसान और पशुपालक दोनों परेशान हैं।

बरारी की राजद नेत्री बेबी यादव ने नाव से बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “लोगों के घर डूब गए हैं, कहां शरण लेंगे? कोई सुविधा नहीं, कोई राहत नहीं। 15 दिनों से लोग त्राहिमाम हैं। सरकार को तुरंत राहत कार्य शुरू करना चाहिए।”

स्थानीय बाढ़ पीड़ित चरित्र मंडल, लालू मंडल, सुबोध और कई महिलाएं अपनी व्यथा बताते हुए कहते हैं कि पिछले कई दिनों से घर में रखा सूखा राशन — चूड़ा और मुढ़ी खाकर ही पेट भर रहे हैं। पानी का स्तर इतना बढ़ गया है कि घर में रहना नामुमकिन हो गया है। कई परिवार मवेशियों को साथ लेकर ऊंचे बांध या सड़कों पर डेरा जमाए हुए हैं। बरारी के कई गांवों में बाढ़ के कारण स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद हैं। बच्चे पढ़ाई से वंचित हैं और महिलाएं साफ पानी के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं। वहीं, बीमार और बुजुर्गों के लिए स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि दवाइयों और डॉक्टरों की उपलब्धता लगभग शून्य है।

ग्रामीण बताते हैं कि पिछले वर्षों में भी यहां बाढ़ आई थी, लेकिन इस बार पानी का स्तर ज्यादा है और सरकारी राहत की गति बेहद धीमी। कई लोगों के पास प्लास्टिक की तिरपाल तक नहीं है, जिससे बारिश में भीगना रोज़ की मजबूरी बन गई है। बरारी इलाके में बाढ़ की मार से जिंदगी ठहर सी गई है। खेतों में लगी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं और रोज़ कमाने-खाने वालों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। लोग अब सिर्फ एक आस लगाए बैठे हैं — कि प्रशासन और सरकार से जल्द से जल्द राहत और मदद पहुंचे, ताकि वे अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकें।

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Written By -Amarjeet Kumar

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