IMG 20210702 2459 बांका में आवारा कुत्तों के आतंक से मिलेगी राहत, नगर परिषद में शुरू होगा नसबंदी व टीकाकरण अभियान.

बांका में आवारा कुत्तों के आतंक से मिलेगी राहत, नगर परिषद में शुरू होगा नसबंदी व टीकाकरण अभियान.

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By Banka Darshan News

बांका शहर समेत जिले के विभिन्न शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक से लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है। बिहार सरकार के शहरी विकास एवं आवास विभाग ने बांका नगर परिषद क्षेत्र में जानवर जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम लागू करने की दिशा में पहल तेज कर दी है। इसको लेकर एनआईसी पोर्टल के टेंडर कॉलम में विस्तृत निविदा प्रकाशित कर योग्य एजेंसियों एवं संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

 

प्रकाशित टेंडर दस्तावेज के अनुसार चयनित एजेंसी द्वारा नगर परिषद क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी, एंटी रेबीज टीकाकरण एवं पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण का कार्य किया जाएगा। इसके तहत शहर और आसपास के इलाकों से आवारा कुत्तों को मानवीय तरीके से पकड़ा जाएगा। इसके बाद उनकी चिकित्सकीय जांच कर नसबंदी और रेबीज टीकाकरण किया जाएगा। उपचार पूर्ण होने पर उन्हें पुनः उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा।

 

विभागीय दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि कार्य करने वाली एजेंसी को ऐनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) के सभी मानकों एवं गाइडलाइंस का पालन करना होगा। साथ ही प्रत्येक पशु का रिकॉर्ड तैयार करना, टैगिंग, डेटा संधारण, मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना और जनजागरूकता अभियान चलाना भी एजेंसी की जिम्मेदारी होगी।

 

टेंडर में यह भी कहा गया है कि एजेंसी के पास प्रशिक्षित पशु चिकित्सक, पैरावेट, डॉग कैचर, एनिमल हैंडलर तथा आवश्यक संसाधन उपलब्ध होना अनिवार्य होगा। अनुभवी एवं तकनीकी रूप से सक्षम एजेंसियों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदन के साथ अनुभव प्रमाणपत्र, वित्तीय दस्तावेज, गैर-ब्लैकलिस्ट शपथपत्र एवं अन्य आवश्यक कागजात जमा करने होंगे।

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गौरतलब है कि बांका शहर में बीते कुछ वर्षों से आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सुबह-शाम सड़कों पर झुंड बनाकर घूमने वाले कुत्तों से राहगीरों, स्कूली बच्चों, बाइक चालकों एवं बुजुर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई मोहल्लों में कुत्तों के काटने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि ABC कार्यक्रम प्रभावी तरीके से लागू हुआ तो आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण के साथ रेबीज जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।