file 00000000787871fab9ef8032c60e664b 1 बांका के चांदन कटसकरा में तांबा-जस्ता खनन की तैयारी से हलचल, तीन गांवों पर विस्थापन का खतरा

बांका के चांदन कटसकरा में तांबा-जस्ता खनन की तैयारी से हलचल, तीन गांवों पर विस्थापन का खतरा

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By Banka Darshan News

बांका जिले के चांदन अंचल अंतर्गत कटसकरा मौजा की लगभग 260 एकड़ भूमि के गर्भ में तांबा, जस्ता, शीशा समेत कई कीमती खनिज पदार्थ होने की खबर से पूरा इलाका अचानक सुर्खियों में आ गया है। संबंधित विभागों द्वारा खनन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी और हाल के दिनों में राजस्व कर्मियों व अमीनों द्वारा भूमि का भौतिक सत्यापन किए जाने से क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अगर सभी प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं सुचारू रूप से पूरी हो जाती हैं तो आने वाले दिनों में यहां बड़े पैमाने पर खनन कार्य शुरू हो सकता है।

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स्थानीय लोगों और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार कटसकरा मौजा के जिस भूभाग में खनिज संपदा होने की संभावना जताई जा रही है, वहां बड़ी मात्रा में तांबा, जस्ता, शीशा सहित अन्य बहुमूल्य धातुएं मौजूद हैं। इन खनिज पदार्थों के खनन से न केवल क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी बल्कि राज्य सरकार के राजस्व में भी भारी वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां खनन कार्य शुरू होता है तो देश को इन धातुओं के आयात पर निर्भरता कम करनी पड़ सकती है, जिससे विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।

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हालांकि खनिज संपदा मिलने की खबर के साथ ही क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ गई है। खनन की जद में पीड़रा, मांझीडीह और नन्हुआकुरा गांव आने की बात कही जा रही है। इन गांवों के हजारों लोगों के सामने विस्थापन का खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर बड़े पैमाने पर खनन शुरू हुआ तो उनके घर, खेत, बगीचे और वर्षों पुरानी बसावट प्रभावित हो जाएगी।

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जानकारी के अनुसार कुल 260 एकड़ भूमि में से करीब 230 एकड़ जमीन रैयतों की है, जबकि केवल लगभग 30 एकड़ सरकारी भूमि है। रैयती भूमि पर ग्रामीणों के मकान, खेत-खलिहान और बाग-बगीचे मौजूद हैं। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती हजारों लोगों के पुनर्वास और मुआवजे की होगी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार बिना उचित पुनर्वास योजना के खनन शुरू करती है तो उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

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ग्रामीणों ने अब अपनी मांगें भी खुलकर रखनी शुरू कर दी हैं। उनका कहना है कि यदि उनकी जमीन ली जाती है तो बदले में जमीन दी जाए और वह भी एक ही जगह पर ताकि पूरा गांव एक साथ बस सके। इसके अलावा प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग भी ग्रामीण कर रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने चार गुना मुआवजा देने की मांग उठाई है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे।

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ग्रामीण उत्तम प्रसाद यादव ने बताया कि अगर खनन के कारण विस्थापन होता है तो यह उनके परिवार का चौथा विस्थापन होगा। उन्होंने अपने पूर्वजों के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पूर्वज मगध राज के पाटलीपुत्र में रहते थे, लेकिन वहां की परिस्थितियों के कारण 16वीं सदी में वे गिद्धौर राज क्षेत्र में आकर बसे। इसके बाद 17वीं सदी तक परिवार जमुई जिले के विभिन्न इलाकों में रहा और अंततः 18वीं सदी में चार भाई रंगू महतो, हीरामण महतो, लाल महतो और जगलाल महतो चांदीपीड़ा और पीड़रा गांव में आकर बस गए। तभी से उनका परिवार यहां रह रहा है और अब गांव में सैकड़ों लोगों की आबादी बस चुकी है।

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उत्तम यादव ने बताया कि उनके पूर्वजों से उन्हें जानकारी मिली थी कि अंग्रेजी शासनकाल के दौरान भी इस क्षेत्र में खनिज संपदा की खोज हुई थी। उन्होंने बताया कि गांव से सटे गढ़िया बाबा स्थान के पास अंग्रेजों ने पहाड़ी क्षेत्र में खुदाई कराई थी। आज भी वहां बड़े-बड़े गड्ढे मौजूद हैं जो उस खुदाई के प्रमाण माने जाते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि अंग्रेजों ने करीब 40 फीट गहरी खुदाई करवाई थी, लेकिन बाद में अचानक काम बंद कर चले गए। उस समय इस्तेमाल किए गए कुछ औजार जैसे फावड़ा, जंजीर और लोहे के सब्बल आज भी गांव के कुछ घरों में सुरक्षित रखे हुए हैं।

 

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि वर्ष 2024 की शुरुआत में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग यानी जीएसआई की टीम ने क्षेत्र में डीप स्लॉटर ड्रिलिंग कर खनिज के नमूने एकत्र किए थे। टीम ने पहाड़ी की तलहटी में दो स्थानों पर गहराई तक ड्रिलिंग कर जांच के लिए सैंपल भेजे थे। इसके बाद से ही इलाके में खनिज संपदा मिलने की चर्चा तेज हो गई थी।

 

उमेश मंडल, दीपलाल यादव, सुधीर मंडल, बहादुर यादव, विनोद यादव, लखेंद्र साह, टीपन यादव, बालो यादव, गुरुदेव मंडल, महेंद्र यादव समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में अंचल कार्यालय से राजस्व कर्मचारी और अमीन गांव पहुंचकर भूमि का भौतिक सत्यापन कर चुके हैं। इससे ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें खनिज संपदा से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार पहले उनके पुनर्वास और भविष्य की गारंटी सुनिश्चित करे।

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इधर प्रशासन भी मामले को लेकर सक्रिय दिख रहा है। चांदन के सीओ रविकांत कुमार सिंह ने बताया कि लगभग 250 एकड़ क्षेत्र का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित भूभाग में वन भूमि, गैरमजरूआ जमीन और रैयती भूमि शामिल है। अमीन और राजस्व कर्मचारी भूमि को चिन्हित कर रहे हैं, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

 

बताते चलें कि वर्ष 2024 के जनवरी-फरवरी महीने में जीएसआई की टीम ने बांका जिले के कटोरिया और चांदन प्रखंड सहित कई क्षेत्रों में डीप ड्रिलिंग कर खनिज संपदा की खोज की थी। उस दौरान कटोरिया क्षेत्र में सोना मिलने की चर्चाएं भी खूब सुर्खियों में रही थीं। अब कटसकरा मौजा में तांबा, जस्ता और शीशा जैसे खनिज मिलने की संभावना ने एक बार फिर जिले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल पूरे इलाके में विकास की उम्मीद और विस्थापन के डर के बीच ग्रामीणों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

रिपोर्ट – रवि शंकर सिंह